शैक्षिक मनोविज्ञान और शिक्षा आधार विभाग

यह विभाग अपनी स्थापना के समय से विद्यालयी शिक्षा और अध्याापक शिक्षा के मनोवैज्ञानिक आधारों के सुदृढीकरण के लिए कार्यरत है। मार्गदर्शन एवं परामर्श, शांति एवं मूल्यों हेतु शिक्षा और शैक्षिक मनोविज्ञान में अनुसंधान, विकास, प्रशिक्षण और विस्तारण कार्यक्रमों के माध्यम से शैक्षिक सिद्धांत एवं व्यवहार को मनोवैज्ञानिक ज्ञान और परिप्रेक्ष्य प्रदान करना इसका मुख्य केंद्र बिंदु रहा है।

विभाग के मुख्य कार्य क्षेत्र

क. शैक्षिक मनोविज्ञान :यह विभाग पाठ्यचर्या योजना, पाठ्यपुस्तक लेखन, शिक्षक प्रशिक्षण, मूल्यांकन आदि जैसे विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करने में भी अपने संसाधन जुटाता और सहयोग करता है। यह विभाग उच्चतर माध्यंमिक स्तर के लिए मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें तैयार करता है। यह उच्च माध्यमिक स्तर पर मनोविज्ञान के अध्ययन के महत्व‍ पर विद्यार्थियों, अभिभावकों, अध्यापकों तथा विद्यालय प्रशासकों में जागरूकता को बढ़ाने हेतु कार्य की पहल भी कर चुका है। इस क्षेत्र में इस विभाग द्वारा किए गए अन्य क्रियाकलाप निम्नवत् है:-

  • सिद्धांत एवं व्यवहार में मनोवैज्ञानिक ज्ञान के अनुकूलतम उपयोग हेतु परामर्श एवं कार्यशालाओं का आयोजन करना।
  • शैक्षिक मनोविज्ञान के विभिन्न अनुप्रयुक्त क्षेत्रों में अनुसंधान/अंत:क्षेप का संचालन करना।
  • अध्यापक शिक्षा के मनोवैज्ञानिक आधारों में अध्यापकों / शिक्षक प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देना।
  • देश भर के अनुसंधानकर्ताओं और व्या्वसायिकों के प्रयोग हेतु पुस्तकीय सेवाएं उपलब्धं कराना।(मनोवैज्ञानिक परीक्षण की सूची)

ख. मार्गदर्शन एवं परामर्श : गत पाँच दशकों से राज्य स्तर पर अनुसंधान, संसाधन सामग्री के विकास, व्यावसायिकों के प्रशिक्षण तथा क्षमता-निर्माण में शैक्षिक मनोविज्ञान के अनुप्रयुक्त क्षेत्र तथा मार्गदर्शन एवं परामर्श एक मुख्य सरोकार रहा है। विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण दिवसीय (नौ माह का) डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया। विभाग ने 2002-03 में एशियाई और अफ्रीकी देशों के लिए मार्गदर्शन एवं परामर्श में एक अंतर्राष्ट्रींय डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जिसे बाद में संशोधित किया गया और वर्तमान में 2009-10 दूरस्थ माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान के साथ-साथ क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों के पाँच अध्ययन केंद्रों अजमेर, भोपाल, मैसूर, भुवनेश्वर और शिलाँग से आयोजित किया जाता है। इस क्षेत्र में विभाग के अन्य क्रियाकलाप निम्नवत हैं : -

  • राज्य स्तर पर मार्गदर्शन कार्मिकों का क्षमता निर्माण
  • सामग्री विकास - मार्गदर्शन एवं परामर्श में प्रशिक्षण हेतु मुद्रण, ऑडियो और वीडियो में
  • मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यक्रमों / सेवाओं के क्रियान्वयन के लिए गैर-सरकारी संगठनों/ संगठनों / राज्यों के विभागों के डाटाबेस का रखरखाव करना
  • स्थिति सर्वेक्षण/अनुसंधान/अनुवर्ती अध्ययन का संचालन करना।
  • विस्तारण क्रियाकलापों हेतु मार्गदर्शन एवं परामर्श संसाधन केंद्र का सुदृढीकरण करना।
  • प्रशिक्षित काउंसलर्स का डेटाबेस (2009-2013) | प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की निर्देशिका

C. मूल्य शिक्षा और शांति के लिए शिक्षा: : मूल्य शिक्षा पर काम इक्यासीवीं संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विभाग में किया गया, जिसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एनसीईआरटी को क्रियान्वयन के लिए भेजा था। वर्ष 2000 के दौरान, एनसीईआरटी ने मूल्य शिक्षा के लिए एजेंडा आगे रखा। एमएचआरडी में मूल्य शिक्षा पर विशेषज्ञों की समिति ने सिफारिश की | एनसीईआरटी को स्कूल प्रणाली में सभी स्तरों पर मूल्य शिक्षा को मजबूत करने के लिए एक नोडल केंद्र बनाया जा सकता है। परिकल्पित कार्य स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में शिक्षा के मूल्य उन्मुखीकरण के लिए कार्यक्रमों की योजना, समन्वय और क्रियान्वयन करना था। परिषद ने विभाग में राष्ट्रीय मूल्य शिक्षा संसाधन केंद्र (एनआरसीवीई) स्थापित करने का निर्णय लिया। राष्ट्रीय मूल्य शिक्षा संसाधन केंद्र (एनआरसीवीई) पर संदर्भ पुस्तकालय मूल्य शिक्षा से संबंधित सामग्रियों के खजाने के रूप में कार्य करता है जर्नल ऑफ वैल्यू एजुकेशन शिक्षाविदों और व्यवसायियों के लिए आदान-प्रदान हेतु एक मंच प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण गतिविधि थी।

राष्ट्रीय परामर्श के बाद एनसीईआरटी के चार क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों द्वारा क्षेत्रीय परामर्श के आयोजन ने मूल्य शिक्षा के क्षेत्र में अंतर्दृष्टि, अनुभव और नवाचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान किया। विभाग ने प्रख्यात शिक्षाविदों और विशेषज्ञों द्वारा मूल्य शिक्षा और संबंधित विषयों पर विस्तार व्याख्यान भी आयोजित किए। जैन धर्म और सिख धर्म के साहित्य में उपलब्ध कहानियों और दृष्टांतों पर आधारित पूरक पठन सामग्री बच्चों के लिए तैयार की गई। माता-पिता के लिए मूल्य शिक्षा पर सरल पठन सामग्री भी विकसित की गई। विभाग ने शिक्षकों के लिए ‘शांति की राहे’ नामक एक पुस्तिका विकसित और प्रकाशित की है, जिसका हिंदी में अनुवाद ‘शांति की राहें’ के रूप में भी किया गया है, ताकि शांति के लिए आवश्यक कौशल, दृष्टिकोण और मूल्यों को व्यक्त किया जा सके और एक अन्य दस्तावेज ‘स्कूलों में मूल्यों के लिए शिक्षा- एक रूपरेखा’ जो हमारी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।