संक्षिप्त विवरण
भाषा शिक्षा विभाग की स्थापना वर्ष 2005 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूल शिक्षा के सभी स्तरों पर भाषा शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। यह विभाग हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू और संस्कृत भाषाओं में पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम और शैक्षिक सामग्री का विकास करता है। विभाग भाषा कौशल के संवर्धन, मातृभाषा के उत्थान और लचीले मूल्यांकन विधियों के माध्यम से शिक्षार्थी-केंद्रित प्रगतिशील शिक्षाशास्त्र एवं मूल्यांकन पद्धतियों को प्रोत्साहित करता है। साथ ही, भाषा अधिगम के महत्व के साथ-साथ लैंगिक समानता, पर्यावरण, समाज और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (CWSN) से संबंधित मुद्दों पर भी जागरूकता उत्पन्न की जाती है। विभाग विभिन्न भाषाई शिक्षा क्षेत्रों में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और बोर्डों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करता है। इसका प्रयास मातृभाषा-आधारित शिक्षा को सशक्त बनाना और बहुभाषावाद को सामाजिक जीवन के मूल में स्थापित करना है, जिसके लिए यह सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक नवाचारों के माध्यम से निरंतर अद्यतन रहता है।
दृष्टि
भाषा शिक्षा विभाग का उद्देश्य मुख्यतः विद्यालयी शिक्षा में भाषा अधिगम की प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करना है। यह मातृभाषा और अन्य भाषाओं के बीच सेतु स्थापित करने पर केंद्रित है। विभाग का लक्ष्य ऐसी उपयुक्त सामग्री, शिक्षण विधियाँ और संसाधन विकसित करना है जो भाषा अधिगम के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवन कौशल और ज्ञान का विकास सुनिश्चित कर सकें, जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (एनसीएफ 2023) में परिकल्पित किया गया है।
भूमिका और कार्य
भाषा शिक्षा विभाग का उद्देश्य अधिगम के व्यापक सिद्धांतों को साकार करना है, ताकि बच्चों को आत्मनिर्भर शिक्षार्थी और समरस नागरिक के रूप में विकसित किया जा सके। विभाग भाषा शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास, प्रशिक्षण और विस्तार कार्यक्रमों पर निरंतर और गहन रूप से कार्य करता है, ताकि स्कूल शिक्षा के सभी स्तरों पर भाषा शिक्षण-अधिगम की दक्षताओं में महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किया जा सके। भाषा शिक्षा विभाग की भूमिका को निम्नलिखित रूप में संक्षेपित किया जा सकता है:
- भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए भाषा शिक्षा के लिए उपयुक्त शिक्षण संसाधनों की योजना बनाना।
- मातृभाषा को अन्य भाषाओं के अधिगम के लिए शिक्षण माध्यम के रूप में बढ़ावा देना|
- भाषा अधिगम और शिक्षण के लिए भाषाई संसाधनों का निर्माण, नवीन शिक्षण विधियों तथा ई-सामग्री का विकास करना।
- भाषा अधिगम संसाधनों और शिक्षण विधियों का प्रसार करना।
- भाषा अधिगम की प्रवृत्तियों और नवाचारों के विकास एवं संवर्धन के लिए व्याख्यान, सम्मेलन, वेबिनार आदि के माध्यम से मंच प्रदान करना।
- न्य अध्ययन क्षेत्रों को भाषा के साथ एकीकृत करना और सामग्री विकास में सहयोग प्रदान करना।
