अखिल भारतीय विद्यालयी शिक्षा सर्वेक्षण

शिक्षा सर्वेक्षण

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा समय-समय पर आयोजित अखिल भारतीय शैक्षिक सर्वेक्षण (एआईईएस) का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में देश की समग्र उन्नति की जानकारी एकत्रित करना, संकलित करना और प्रसारित करना है। ये सर्वेक्षण सूक्ष्म स्तर के साथ-साथ वृहद स्तर पर शैक्षिक योजनाएँ निर्मित करने, शैक्षिक नीतियाँ बनाने और केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न शैक्षिक योजनाओं की प्रगति की निगरानी करने हेतु बुनियादी जानकारी प्रदान करते हैं। इसमें ग्रामीण बस्तियों में स्कूली शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता, स्कूलों में भौतिक और शैक्षिक सुविधाएं, प्रोत्साहन योजनाएं और लाभार्थी, शिक्षा का माध्यम और पढ़ाई जाने वाली भाषाएं, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, बालिकाओं और शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक समुदाय के नामांकन, शिक्षक और उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, सहायक कर्मचारी और शिक्षा के +2 स्तर पर विषयवार नामांकन शामिल हैं। इसके अलावा, गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों, वैकल्पिक स्कूलों और एआईई केंद्रों, संस्कृत पाठशालाओं, मदरसों और मकतबों को कवर करने वाले ओरिएंटल स्कूलों, दिव्यांग बच्चों हेतु विशेष स्कूलों और प्राथमिक-पूर्व संस्थानों में नामांकन और शिक्षकों को शामिल किया गया है।

शामिल संगठन

राष्ट्रीय स्तर पर तीन संगठन, अर्थात् मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) शामिल हैं। एमएचआरडी सर्वेक्षण के लिए धन और इसके कुशल निष्पादन के लिए प्रशासनिक सहायता प्रदान करता है। एनसीईआरटी ने सभी शैक्षणिक इनपुट प्रदान करने, सर्वेक्षण संचालन के प्रबंधन और समन्वय और प्रसार हेतु रिपोर्ट लाने की जिम्मेदारी साझा की है। एनआईसी सर्वेक्षण के कम्प्यूटरीकरण के सभी पहलुओं के लिए जिम्मेदार है जिसमें सॉफ्टवेयर निर्माण, डेटा का प्रसंस्करण और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर परिणामों का सारणीकरण शामिल है। इसके अलावा, सर्वेक्षण गतिविधियों के तेज़ संचार और प्रबंधन के लिए एनआईसीएनईटी नेटवर्क सुविधा का उपयोग किया जाता है। राज्य स्तर पर सभी 35 राज्य सरकारें और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन सर्वेक्षण के निष्पादन में शामिल हैं।

सर्वेक्षण के उद्देश्यध

विभिन्न जनसंख्या स्लैब में बस्तियों (अनुसूचित जातियों /अनुसूचित जनजातियों सहित) के भीतर प्राथमिक, उच्च-प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तरों के लिए स्कूली शिक्षा सुविधा की उपलब्धता का आकलन करना। यदि सुविधा बस्ती के भीतर नहीं है, तो कितनी दूरी पर उपलब्ध है। मान्यता प्राप्त विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करना जैसे भवन, कक्षा-कक्ष, पेयजल, बिजली, मूत्रालय, शौचालय, छात्रों और शिक्षकों के लिए फर्नीचर, प्रोत्साहन योजनाएँ और लाभार्थी, चिकित्सा जाँच और छात्रों का टीकाकरण। मान्यता प्राप्त विद्यालयों के सभी चरणों में कक्षा-वार नामांकन जानना। मान्यता प्राप्त विद्यालयों के सभी चरणों में दिव्यांग बच्चों की संख्या जानना। शैक्षणिक स्ट्रीम में जेंडर के अनुसार विषय-वार नामांकन और स्कूल के उच्चतर माध्यमिक स्तर पर योग्य शिक्षकों की उपलब्धता का पता लगाना। माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालय, शारीरिक शिक्षा शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्ष, मार्गदर्शन परामर्शदाता, गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उपलब्धता के बारे में जानना। मान्यता प्राप्त विद्यालयों में विभिन्न स्कूल चरणों में शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता वाले शिक्षकों (जेंडर और अनुसूचित जातियों /अनुसूचित जनजातियों/अन्य पिछड़ा वर्ग/अन्य) की स्थिति का आकलन करना। पढ़ाई जाने वाली भाषाओं और शिक्षण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली भाषाओं के संबंध में मान्यता प्राप्त विद्यालयों का वितरण पता लगाना। गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों की प्राथमिक/उच्च प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन और शिक्षकों का पता लगाना। शिक्षा गारंटी योजना और वैकल्पिक एवं अभिनव शिक्षा (ईजीएस और एआईई) के तहत स्कूलों/केंद्रों में नामांकन और प्रशिक्षकों की स्थिति का आकलन करना। प्री-प्राइमरी स्कूलों में जेंडर के आधार पर बच्चों और शिक्षकों की संख्या का पता लगाना। विशेष स्कूलों में विकलांगता के आधार पर नामांकन, शिक्षकों, संरचनात्मक सुविधाओं, उपकरणों और शिक्षण सामग्री का पता लगाना। ओरिएंटल स्कूलों, जैसे मकतब, मदरसा और संस्कृत पाठशालाओं में नामांकन और शिक्षकों की स्थिति का पता लगाना। यूईई के संदर्भ में एकल आयु, नए प्रवेशकों, पदोन्नत, दोहराने वालों और उपस्थिति के आधार पर कक्षा-वार नामांकन का अनुमान लगाना।