एक दिन नानी रमा को सुबह-सुबह उठाने लगीं।
नानी को अपना चश्मा नहीं मिल रहा था।
नानी को चश्मे के बिना मुश्किल हो रही थी।
वह अपनी ज़रूरी चीज़ें नहीं ढूँढ़ पा रही थीं।
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