माधव ने मिमी के दोनों पैरों में घुँघरू पहना दिए।
घुँघरू लाल रंग के सुंदर से धागे में बँधे हुए थे।
मिमी कूदती-फाँदती माधव के साथ चल दी।
सब लोग उसके घुँघरुओं की छुन-छुन सुनने लगे।
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