काजल और माधव रोज़ मुन्‍नी को देखते रहते थे।
वे चुन्‍नी से अभी भी नाराज़ थे।
एक दिन मुन्‍नी बहुत नीचे आकार तिलचट्टा पकड़ रही थी।
माधव की नज़र उस पर पड़ी।