प्रथम संस्करण : जुलाई 2016 आषाढ़ 1938
© राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् , 2016
PD
पुस्तकमाला निर्माण समिति
कंचन सेठी, कृष्ण कुमार, ज्योति सेठी, टुलटुल विश्वास, मुकेश मालवीय, राधिका मेनन, शालिनी शर्मा, लता पाण्डे (स्वर्गीय), स्वाति वर्मा, सारिका वशिष्ठ, सीमा कुमारी, सोनिका कौशिक, सुशील शुक्ल
सदस्य-समन्वयक- लतिका गुप्ता
चित्रांकन, सज्जा तथा आवरण - निधि वाधवा
राष्ट्रीय समीक्षा समिति
अशोक वाजपेयी, पूर्व कुलपति, महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा; फरीदा अब्दुल्ला खान, प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष, शैक्षणिक अध्ययन विभाग, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली; अपूर्वानंद, रीडर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय; दिल्ली; शबनम सिन्हा, सीईओ, आईएल एवं एफएस, मुंबई; नुजहत हसन, निदेशक, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली; रोहित धनकर, निदेशक, दिगन्तर जयपुर।
पुस्तकमाला रूपांतरित संस्करण समिति
परियोजना समन्वयक– अनुपम आहूजा, प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष, विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्
वरिष्ठ अनुसंधान सहायक– लिप्ता सामल, डिएन मिडिलटन, शालिनी यादव, रुबीना सैफ़ी
संकेत भाषा कलाकार- रेखा आनंद
संकेत भाषा पुनरीक्षण विशेषज्ञ- ऋचा पाण्डे
श्रव्य-दृश्य कलाकार- शालिनी यादव
ग्राफिक अभिकल्पक तथा फ्लैशकार्ड इमेज– विशाल श्रीवास्तव
डिजिटल रूपांतरित संस्करण समिति
दीपेंद्र मनोचा, अध्यक्ष एवं संस्थापक, प्रबंधन न्यासी, डेज़ी फोरम ऑफ इंडिया, सक्षम; प्रशांत रंजन वर्मा, तकनीकी सलाहकार, डेज़ी कंसोर्टियम तथा अमित वर्मा, तकनीकी सलाहकार
विशेष धन्यवाद
अनीता जुल्का, विनय सिंह, प्रोफ़ेसर, भारती, सहायक प्रोफ़ेसर, डीईजीएसएन, एनसीईआरटी; राजाराम एस. शर्मा, प्रोफ़ेसर, संयुक्त निदेशक; सीआईईटी; अमरेन्द्र प्रसाद बहेरा, प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, आईसीटी प्रभाग; लाल सिंह, अध्यक्ष, एमपीडी; डॉ. अजित होरो तथा टीम, श्रव्य निर्माता; मनसुख राठौड़ तथा टीम, निर्माता; पुष्पम कुमार, संपादक, सीआईईटी, एनसीईआरटी; आयुष कुमार, टाइप सेटिंग; उषा नायर, चंद्रिका, मैथ्यू जॉन एवं आर. पी. सिंह संपादन सहयोग, दिल्ली, जयपुर, जमशेदपुर और भुवनेश्वर के पुस्तिका परिक्षण के दौरान संयोजक आई. पी. गौरम्मा, एसोसिएट प्रोफ़ेसर, आरआईई भुवनेश्वर, अभिनव कुमार, आईई संयोजक, डॉ सुरेश चंद अग्रवाल, सहायक निदेशक, आरसीईई, राजस्थान, प्राध्यापक, अध्यापक और बच्चों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद।
220 जी.एस.एम. पेपर पर मुद्रित
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प्रकाशन विभाग में सचिव, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, श्री अरविन्द मार्ग, नई दिल्ली ११००१६ द्वारा प्रकाशित तथा ------------------------------------ द्वारा मुद्रित
बरखा : एक पठन शृंखला ‘सभी के लिए’ का डिजीटल रूपांतरण मूल बरखा पुस्तकमाला का रूपांतरित संस्करण है।बरखा शृंखला में चार स्तरों और पांच कथावस्तुओं वाली चालीस कहानियों की पुस्तिकाएं शामिल हैं। बरखा पुस्तकमाला पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग द्वारा विकसित की गई थी, जिसका उद्देश्य बच्चों को ‘समझ के साथ’ स्वयं पढ़ने के मौके देना है। बरखा की सभी कहानियां दैनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित हैं क्योंकि बच्चों को रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाएँ रोचक लगती हैं। बरखा से पढ़ना सीखने और स्थायी पाठक बनने के साथ-साथ बच्चों को पाठ्यचर्या के हरेक क्षेत्र में संज्ञानात्मक लाभ मिलता है। बरखा की इन सभी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तकमाला को सीखने के सार्वभौमिक स्वरूप (यूनिवर्सल डिज़ाइन फॉर लर्निंग) में ढालने की जरूरत महसूस की गई। इसके तहत अपनाए गए इस संस्करण का उद्देश्य ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने का एक प्रयास है जिसमें समावेशी शिक्षा के तहत सभी बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ अतिरिक्त विशेषताएँ शामिल की गई हैं। बरखा : एक पठन शृंखला ‘सभी के लिए’ का डिजिटल रूपांतरण समावेशी शिक्षा में पूरक पठन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस डिजिटल रूपांतरण का प्रयोग कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और टैबलेट के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है। यह वैकल्पिक फ़ार्मेट युवा पाठकों को पढ़ने के अधिक सुलभ और मजेदार अनुभव प्रदान करने में उपयोगी होंगे। इस डिजिटल संस्करण में हर कहानी की शुरूआत में वीडियो फ़ार्मेट में ‘कहानी का परिचय’ दिया गया है, जो छात्र/छात्राओं में उत्सुकता बढ़ाने और उन्हें प्रेरित करने में मददगार होगा। यह वीडियो संकेत भाषा में भी दिया गया है। हर पेज पर मुख्य आकृतियों को हाइ-रेजोल्यूशन में दिया गया है, जिससे कहानी की महत्वपूर्ण घटना पर ध्यान केन्द्रित करने में मदद मिलेगी, हर कहानी में पाठ और पृष्ठभूमि तीन रंगों में दी गई है ताकि छात्र/छात्राएं अपनी प्राथमिकता और आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु देख सकें। कुछ अन्य विशेषताएँ भी शामिल की गई हैं जैसे- कठिन शब्दों के लिए चित्र खिड़की के रूप में फ़्लैशकार्ड, वाक्य की शुरुआत और अंत की ओर संकेत करने के लिए लाल और हरा बिन्दु, पेज के चारों ओर काला बॉर्डर ताकि पाठ और दृश्यों की ओर ध्यान केंद्रित किया जा सके, अगले और पिछले पेज पर जाने के लिए तीर का निशान, जिससे बच्चों को पेज पलटने में आसानी हो। पुस्तकमाला की पैकेजिंग इसी के अनुकूल है। चालीस कहानियों की पुस्तक के आवरण पृष्ठ पुस्तक शेल्फ में दिखाए गए है, जिसपर चालीस कहानियों के शीर्षक दिए गए हैं ताकि बच्चे कहानी का चुनाव अपनी इच्छा से कर सकें। इस अनुकूलित संस्करण का उद्देश्य पाठकों को बहु-संवेदी अनुभव प्रदान करना है। बरखा : एक पठन शृंखला ‘सभी के लिए’ का डिजीटल वर्जन एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बरखा : एक पठन शृंखला ‘सभी के लिए’ प्रिन्ट संकरण में भी उपलब्ध है।
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बच्चों को प्रभावी रूप से पढ़ने में मदद करने के लिए कृपया पुस्तिका के अंत में दिए गए अध्यापकों और अभिभावकों के लिए पेज पढ़ें। यह हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है।