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राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा

शिक्षा की 10+2+3 प्रणाली के प्रारंभ होने के पश्चा त् वर्ष 1976 में एन.एस.टी.एस. योजना में भी परिवर्तन हुआ। अब यह केवल मौलिक विज्ञान तक ही सीमित नहीं था बल्कि सामाजिक विज्ञान, अभियांत्रिकी और आयुर्विज्ञान तक विस्ताारित हो चुका था। इसको राष्ट्री य प्रतिभा खोज योजना (एन.टी.एस.एस.) के रूप में पुनर्नामित किया गया। चूंकि देश में शिक्षा प्रणाली एक परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी, इस योजना को कक्षा X, XI और XII के विद्यार्थियों के लिए खोल दिया गया और प्रत्येेक कक्षा के लिए पृथक-पृथक परीक्षाएं संचालित की गईं। छात्रवृत्तियों की संख्याा को 500 तक बढ़ा दिया गया। चयन प्रक्रिया में भी परिवर्तन किया गया। अब अभ्यईर्थियों को दो वस्तुखनिष्ठक प्रकार की लिखित परीक्षाओं नामत: मानसिक योग्य्ता परीक्षा (एम.ए.टी.) और शैक्षिक अभिवृत्ति परीक्षा (एस.ए.टी.) देनी होती थीं। इन दो परीक्षाओं के अर्हक अभ्य‍र्थियों की अनुबद्ध संख्या को आमने-सामने साक्षात्कासर के लिए उपस्थित होना होता था। एम.ए.टी., एस.ए.टी. और साक्षात्कार में प्राप्तष किए गए सम्मिलित प्राप्तां्कों के आधार पर अंतिम पुरस्का र दिए जाते थे।

वर्ष 1981 में छात्रवृत्तियों की संख्याा पुन: 500 से बढ़ाकर 550 कर दी गई। ये 50 छात्रवृत्तियाँ केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्य र्थियों के लिए थीं। वर्ष 1983 में छात्रवृत्तियों की संख्याी पुन: बढ़ाकर 750 कर दी गई जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्य9र्थियों के लिए 70 छात्रवृत्तियों का विशेष प्रावधान था। यह व्यवस्था तब तक चलती रही जब तक वर्ष 1985 में इस योजना का विकेन्द्रीकरण नहीं कर दिया गया। वर्ष 2000 में छात्रवृत्तियों की संख्याव को 750 से बढ़ाकर 1000 कर दिया गया जिसमें अनु.जा.और अनु.ज.जाति. के अभ्यकर्थियों के लिए राष्‍ट्रीय मानकों के आधार पर क्रमश: 15 प्रतिशत एवं 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

इस योजना में एक और परिवर्तन वर्ष 2006 में किया गया जहाँ एन.टी.एस. परीक्षा कक्षा VIII के अन्तर में आयोजित की जाती थी। वर्ष 2008 की परीक्षा से शारीरिक रूप से विकलांग विद्यार्थियों के लिए 3 प्रतिशत के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

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