भाषा शिक्षा विभाग

परिषद् विद्यालयों में मानविकी शिक्षा में गुणात्म क सुधार लाने के व्या पक उद्देश्यप से विविध भूमिकाओं का वहन करती है। यह प्राथमिक, उच्चक प्राथमिक, माध्यवमिक और उच्चदतर माध्यवमिक स्तकरों के लिए भाषाओं के मॉडल पाठ्य विवरण और शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास में शामिल रही है।

भाषा शिक्षा विद्यालय में बच्चों के विकास-काल के दौरान अधिगम और विकास का आधार है। यह सामान्यर अधिगम और बाद के वर्षों में विशेषत: विषय सामग्री के अधिगम में समान रूप से महत्वापूर्ण है। भाषा शिक्षा विभाग का लक्ष्य बच्चों को स्व तंत्र शिक्षार्थी और सद्भावपूर्ण नागरिकों के रूप में ढालने के लिए अधिगम के समग्र सिद्धांतों को साकार करना है। विभाग की स्थातपना 01 जुलाई 2005 को की गई थी और यह पाठ्यचर्या एवं अनुदेशी सामग्री के विकास एवं मूल्यांयकन के माध्य म से भाषा शिक्षा के प्रसार में; अध्या पकों के व्याठवहारिक विकास और विद्यालय शिक्षण के सभी स्त‍रों पर भाषा शिक्षा में अनुसंधान के संचालन में सक्रिय कार्य करता है। विभाग अपने सतत् अभिमुखीकरण और भाषा शिक्षा की नवाचारी कार्यनीतियों एवं उभरती परिपाटियों पर कार्य के माध्याम से अध्याकपकों के सशक्तिकरण पर बल देता है।

भाषा शिक्षा विभाग महत्वप देता है :-

  • विद्यालयों में अधिगम के माध्य म के रूप में बच्चों की मातृभाषा/गृहभाषा (ओं) का प्रयोग।
  • भारत की भाषायी विविधता जटिल चुनौतियाँ पेश करती है परंतु सा‍थ ही अनेक अवसर भी प्रदान करती है। बहुभाषिता एक निश्चित ज्ञानात्म क श्रेष्ठपता प्रदान करती है।
  • त्रिभाषा-सूत्र भारत की भाषायी स्थिति की चुनौतियों तथा अवसरों के संदर्भ में समाधान का एक प्रयास है। यह एक ऐसी कार्यनीति है जो अधिक भाषाएँ सीखने के लिए प्रारंभिक पटल का कार्य करती है।
  • हिंदीतर भाषी राज्यों में बच्चे हिंदी सीखते हैं। हिंदी भाषी राज्योंस में बच्चे अपने क्षेत्र में न बोली जाने वाली भाषा सीखते हैं। इन भाषाओं के अतिरिक्तम एक आधुनिक भारतीय भाषा के रूप में संस्कृात का भी अध्यययन किया जा सकता है।